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देश के इतिहास में सबसे लंबी ‘निर्वाचित सेवा’ का नया कीर्तिमान : नरेंद्र मोदी ने नेहरू को पीछे छोड़ा

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय राजनीति में बुधवार का दिन एक ऐतिहासिक मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब लोकतांत्रिक रूप से चुने गए देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधान सेवक बन गए हैं। मई 2014 में पहली बार सत्ता संभालने से लेकर जून 2026 तक, वे कुल 4,399 दिनों तक इस पद पर रह चुके हैं। इस अवधि के साथ ही उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के एक बड़े रिकॉर्ड को पार कर लिया है।

क्या है इस रिकॉर्ड का गणित?

यहाँ ध्यान देना जरूरी है कि यह रिकॉर्ड ‘निर्वाचित’ यानी आम चुनावों में जनता द्वारा चुनकर आए प्रधानमंत्री के रूप में तय हुआ है। नरेंद्र मोदी ने 2014 की चुनावी जीत के बाद से लगातार जनता के जनादेश के साथ शासन किया है। दूसरी ओर, पंडित नेहरू ने कुल मिलाकर 16 साल और 286 दिनों तक देश का नेतृत्व किया, लेकिन इसमें से उनका ‘निर्वाचित’ कार्यकाल 4,398 दिनों का था। दरअसल, 1952 के पहले आम चुनाव से पहले वे अंतरिम (बिना चुनाव वाली) सरकार के मुखिया थे, जिसके कारण उनका निर्वाचित कार्यकाल इस नए आंकड़े से थोड़ा कम रह गया।

भारत मंडपम में सजेगा एनडीए का मंच

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के जश्न और प्रधानमंत्री के सम्मान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) दिल्ली के भारत मंडपम में एक भव्य सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में एनडीए गठबंधन वाले 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और तमाम दिग्गज नेता जुटेंगे। कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन समेत कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रहेगी।

भविष्य की योजनाओं और वैश्विक मुद्दों पर मंथन

इस विशेष बैठक के दौरान एनडीए की तरफ से प्रधानमंत्री को बधाई देने का एक आधिकारिक प्रस्ताव भी लाया जाएगा। इसके साथ ही, सरकार के आगामी एजेंडे और विकास कार्यों का खाका (रोडमैप) सामने रखा जाएगा।

बैठक में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर चर्चा होगी:

बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति।

जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाना।

साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की रणनीति।

पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के मौजूदा हालातों और वैश्विक सुरक्षा पर विचार-विमर्श।

इस महत्वपूर्ण बैठक में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू सहित एनडीए के सभी सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की पूरी संभावना है।

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