पुलिस स्मृति दिवस : सीएम साय ने बस्तर में शांति और विकास को सराहा, अमर शहीदों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना स्थित चौथी वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल परिसर में पुलिस स्मृति दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए कर्तव्य पथ पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर जवानों को नमन किया और शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में शहीद पुलिस अधिकारियों एवं सुरक्षा बलों के परिजनों को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
बस्तर में शांति और विकास का नया दौर
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को मिली निर्णायक सफलता जवानों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान का परिणाम है। कभी हिंसा और भय से प्रभावित रहे बस्तर अंचल में अब सुरक्षा और विश्वास का माहौल कायम हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और केंद्रीय बलों के सहयोग का जिक्र करते हुए कहा कि नियद नेल्लानार योजना, पीएम जनमन और धरती आबा अभियान जैसी कल्याणकारी योजनाओं से दूरदराज के गांवों तक बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं, जिससे नागरिकों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
इतिहास और शहीदों का शौर्य
कार्यक्रम में 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों का डटकर मुकाबला करने वाले भारतीय पुलिस के 10 वीर जवानों की शहादत को याद किया गया। पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने जानकारी दी कि 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच नक्सल विरोधी अभियानों में छत्तीसगढ़ पुलिस के 6 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई माओवादी ढेर हुए।
शहीद परिवारों के प्रति प्रतिबद्धता
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी जवानों के अदम्य पराक्रम की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षा बलों ने बस्तर में शांति बहाली के साथ-साथ विकास की रोशनी पहुंचाई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि शहीद परिवारों का कल्याण और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा प्रशासन हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा रहेगा। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री साय ने राजीव स्मृति वन स्थित शहीद वाटिका पहुंचकर अमर जवान स्तंभ और शहीदों के नामों की पट्टिका पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और बड़ी संख्या में शहीद परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे।
















