देर रात तक स्क्रीन पर नजरें टिकाना सेहत के लिए नुकसानदेह : नींद और मानसिक क्षमता पर पड़ता है असर

नई दिल्ली (एजेंसी)। डिजिटल युग में स्मार्टफोन हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न अंग बन चुका है। सुबह उठते ही फोन चेक करने से लेकर रात को सोने से पहले सोशल मीडिया पर रील्स देखने तक, स्क्रीन का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, तकनीक का यह अत्यधिक और गलत समय पर किया जाने वाला इस्तेमाल अब चिंता का विषय बनता जा रहा है, क्योंकि यह हमारी नींद की गुणवत्ता और मानसिक ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है।
नींद की गुणवत्ता और दिनचर्या पर प्रभाव
हालिया अध्ययनों के आंकड़ों से पता चलता है कि स्क्रीन टाइम में वृद्धि का सीधा संबंध अनिद्रा और देर से सोने की समस्या से है। करीब 5.48 लाख लोगों पर आधारित विश्लेषण के अनुसार, अतिरिक्त स्क्रीन टाइम का हर एक घंटा सोने के समय को औसतन 13 मिनट आगे बढ़ा देता है।
रात में फोन का इस्तेमाल केवल स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी तक ही नुकसानदायक नहीं है। बल्कि नोटिफिकेशन, वीडियो और लगातार मिलते संदेश दिमाग को सक्रिय रखते हैं, जिससे व्यक्ति बिस्तर पर जाने के बाद भी मानसिक रूप से शांत नहीं हो पाता। इसका परिणाम यह होता है कि नींद आने में समय लगता है और रात भर की नींद पूरी नहीं हो पाती।
मानसिक सतर्कता और ध्यान पर असर
छात्रों और वयस्कों पर किए गए 2026 के शोध के अनुसार, सोने से ठीक पहले स्मार्टफोन का लंबे समय तक इस्तेमाल करने वालों में नींद संबंधी समस्याएं अधिक देखी गईं। इसके अलावा, पर्याप्त नींद न मिलने के कारण अगले दिन:
प्रतिक्रिया समय (Reaction Time) धीमा हो जाता है।
ध्यान केंद्रित करने और निर्णय लेने में समस्या आती है।
कार्यक्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और वर्किंग मेमोरी पर नकारात्मक असर पड़ता है।
चिड़चिड़ापन और थकान बनी रहती है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि मोबाइल फोन सीधे दिमाग को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि इससे जुड़ी आदतें स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। देर रात तक जागने से होने वाली नींद की कमी ही असली वजह है।
संतुलित उपयोग ही सही समाधान
डिजिटल उपकरणों को पूरी तरह छोड़ना संभव या व्यावहारिक नहीं है, लेकिन इसके इस्तेमाल के तरीकों में बदलाव लाया जा सकता है।
डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम 1 घंटा पहले फोन का इस्तेमाल बंद करें।
दूरी बनाएं: फोन को बिस्तर से दूर रखें ताकि बार-बार नोटिफिकेशन देखने की आदत पर रोक लगे।
समय सीमा तय करें: दिन के समय भी अनावश्यक स्क्रॉलिंग से बचें।
तकनीक हमारी सुविधा के लिए बनी है, लेकिन जब यह हमारी सेहत और नींद पर हावी होने लगे तो नियंत्रण पाना आवश्यक हो जाता है।
















