चित्रकूट में नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर विशेष आयोजन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी श्रद्धांजलि

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की 16वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम को संबोधित किया। भोपाल से वर्चुअल माध्यम से जुड़ते हुए मुख्यमंत्री ने नानाजी के जीवन मूल्यों और ग्रामीण विकास के प्रति उनके अटूट समर्पण को याद किया।
समाज सेवा के प्रति अनूठा समर्पण
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि नानाजी देशमुख मात्र एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक क्रांति के पुरोधा थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन ग्रामीण उत्थान, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के संकल्प को पूरा करने में लगा दिया। डॉ. यादव ने रेखांकित किया कि नानाजी का दृढ़ विश्वास था कि देश की वास्तविक शक्ति गाँवों में निहित है; यदि गाँव सशक्त होंगे, तभी भारत एक समर्थ राष्ट्र बन पाएगा।
चित्रकूट: तपोस्थली और कर्मस्थली का संगम
मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि चित्रकूट का महत्व दोहरा है—जहाँ यह भगवान श्री राम की पावन तपोस्थली है, वहीं यह नानाजी देशमुख की कर्मभूमि भी है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद’ के दर्शन को धरातल पर उतारने के लिए नानाजी ने यहीं से संकल्प लिया था। इसी विजन के तहत 1991 में उन्होंने देश के पहले ग्रामीण विश्वविद्यालय की नींव रखी।
विकास की दिशा और सरकारी प्रयास
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में नानाजी के आदर्शों पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति के सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही है।
दीनदयाल शोध संस्थान की भूमिका: यह संस्थान स्वास्थ्य, स्वच्छता, आधुनिक कृषि और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
विरासत और आधुनिकता: सरकार अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए गाँवों के आधुनिक विकास के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में जुटी है।
इस अवसर पर चित्रकूट में सांसद गणेश सिंह, कुलगुरू आलोक दुबे, संगठन सचिव अभय महाजन सहित अनेक विशेषज्ञ और शोधार्थी उपस्थित रहे। ज्ञात हो कि नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि 27 फरवरी को है, जिसके उपलक्ष्य में यह त्रि-दिवसीय आयोजन किया जा रहा है।
















