मध्यप्रदेश में सुशासन की नई मिसाल : ‘संकल्प से समाधान’ अभियान ने रचा इतिहास

भोपाल (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने जनसेवा और सुशासन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य सरकार द्वारा चलाए गए ‘संकल्प से समाधान अभियान’ के माध्यम से न केवल नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हुआ है, बल्कि सरकारी योजनाओं की पहुँच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की गई है।
99.9% शिकायतों का सफल निपटारा
इस अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 12 जनवरी से 31 मार्च की अवधि में प्राप्त कुल 47.69 लाख आवेदनों में से लगभग 47.68 लाख का समाधान समय सीमा के भीतर कर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि को पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की जीत बताया है।
अभियान के चार प्रमुख चरण
प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने के लिए इस अभियान को चार चरणों में विभाजित किया गया था:
प्रथम चरण: घर-घर जाकर आवेदनों का संग्रह और डेटा एंट्री।
द्वितीय चरण: पंचायत और वार्ड स्तर पर शिविर लगाकर त्वरित समाधान।
तृतीय चरण: ब्लॉक स्तर पर शेष प्रकरणों का निराकरण।
चतुर्थ चरण: जिला स्तर पर लंबित मामलों को सुलझाकर हितग्राहियों को लाभ वितरण।
कुल 3,659 शिविरों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी पात्र नागरिक योजना के लाभ से वंचित न रहे।
इन क्षेत्रों में मिली बड़ी राहत
अभियान के दौरान विभिन्न सरकारी सेवाओं के वितरण में अभूतपूर्व तेजी देखी गई:
राजस्व सेवाएँ: खसरा-खतौनी और नक्शा प्रतिलिपि के करीब 12.80 लाख आवेदनों का निराकरण।
स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5.62 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला।
पेंशन एवं कल्याण: वृद्धावस्था पेंशन और निर्माण श्रमिकों के पंजीयन से जुड़े लाखों आवेदनों को स्वीकृति दी गई।
बुनियादी सुविधाएँ: ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण अनुमति और नल-जल कनेक्शन के आवेदनों पर प्रभावी कार्रवाई की गई।
विभागों का शानदार प्रदर्शन
विभिन्न विभागों ने निराकरण की दर को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा। राजस्व विभाग (99.42%) और सामान्य प्रशासन (99.17%) इसमें सबसे आगे रहे। इसके अलावा नगरीय विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, और स्वास्थ्य विभाग ने भी 97% से अधिक की सफलता दर हासिल की।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, यह अभियान मात्र एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता का सरकार पर विश्वास मजबूत करने का माध्यम बना है। पोर्टल आधारित ट्रैकिंग और सीएम हेल्पलाइन के जरिए सतत निगरानी ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म कर पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है।
















