नीट विवाद : संसदीय समिति में दिग्विजय सिंह के बदले सुर, सरकार के सकारात्मक रुख को सराहा

नई दिल्ली (एजेंसी)। मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) को लेकर जहां एक तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का एक अलग ही रुख सामने आया है। शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और देश की व्यवस्था पर भरोसा जताया है। समिति की बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि जब देश का शीर्ष नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के सामने परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी ले रहा है, तो सरकार के इस सकारात्मक रवैये का स्वागत किया जाना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज और नीट से जुड़े विवादों पर हुई इस बैठक में दिग्विजय सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा जवाबदेही स्वीकारने को सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने पीएम मोदी या भाजपा की कार्यशैली की तारीफ की हो; इससे पहले भी वे भाजपा-आरएसएस के संगठनात्मक ढांचे की सराहना कर चुके हैं।
छात्रों का भरोसा जीतने के लिए पीएम लिखें पत्र
बैठक के दौरान समिति के अध्यक्ष ने आगामी 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा (Re-exam) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस समय छात्रों और उनके माता-पिता के मन में विश्वास जगाना सबसे जरूरी है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को छात्रों के नाम एक खुला पत्र या संदेश जारी करना चाहिए, ताकि युवाओं को यह अहसास हो कि सरकार इस संकट में उनके साथ खड़ी है।
“परीक्षा पर कोई राजनीति नहीं”
बैठक में जब भाजपा के सदस्य सांसदों ने विपक्ष द्वारा इस मुद्दे पर राजनीति किए जाने का सवाल उठाया, तो दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यहां राजनीति का कोई लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को 21 जून की परीक्षा के सफल और निष्पक्ष आयोजन के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
सीबीएसई फीस विवाद: राहुल गांधी का ‘जेब कतरे’ वाला तंज
एक तरफ जहां दिग्विजय सिंह का रुख थोड़ा नरम दिखाई दिया, वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीबीएसई (CBSE) की पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) फीस को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। सोशल मीडिया पर छात्रों के साथ बातचीत का एक वीडियो साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि जब शिक्षा को सेवा के बजाय बिजनेस बना दिया जाता है, तो गलतियां सुधरने के बजाय बढ़ती हैं।
राहुल गांधी का आरोप:
“आज जेबकतरे सीधे बोर्ड के भीतर बैठे हैं। सीबीएसई की गलती के कारण जिन छात्रों के नंबर कम आए हैं, उन्हें डिजिटल कॉपी के लिए ₹100, री-काउंटिंग के लिए ₹100 और प्रति सवाल पुनर्मूल्यांकन के लिए ₹25 देने पड़ रहे हैं। अपनी ही उत्तर पुस्तिका की सही जांच कराने के लिए एक छात्र को करीब ₹2000 तक खर्च करने पड़ रहे हैं। लाखों छात्रों से इस प्रक्रिया के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली की जा रही है।”
















