देश-विदेश

सरहदों की सुरक्षा के साथ पर्यावरण की रक्षा में भी आगे देश के जवान : अमित शाह

त्रिपुरा (एजेंसी)। विश्व पर्यावरण दिवस के विशेष अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों की जमकर सराहना की। त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित लंकामुरा बॉर्डर आउटपोस्ट पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के प्रहरियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और बीएसएफ के जवान न सिर्फ देश को सुरक्षित रख रहे हैं, बल्कि पर्यावरण के संरक्षण में भी उनका रोल बेहद सराहनीय है।

प्रकृति को परिवार की तरह मान रहे हैं जवान

गृह मंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि हमारे जवान सरकारी आदेशों से ऊपर उठकर, पूरी निष्ठा के साथ पौधों की देखभाल अपने भाई-बहन या बच्चों की तरह कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा:

“पर्यावरण की रक्षा हमारी स्वाभाविक आदत बननी चाहिए, न कि केवल एक नियम। हमें यह सोचना होगा कि देश की सुरक्षा के लिए चौकियां बनाते समय जितने पेड़ काटे गए थे, उससे कहीं ज्यादा पौधे लगाना और उन्हें बड़ा करना अब हमारी जिम्मेदारी है।”

ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत के नुकसान और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का जिक्र करते हुए शाह ने आगाह किया कि अगर आज हम सचेत नहीं हुए, तो आने वाले समय में यह धरती रहने लायक नहीं बचेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कार्बन उत्सर्जन कम करने, इको-फ्रेंडली बिजली बनाने और ऊर्जा की खपत घटाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। यही वजह है कि पेरिस पर्यावरण सम्मेलन में भी भारत के इस मॉडल को एक आदर्श के रूप में सराहा गया था।

सीमाओं की सुरक्षा और जनसांख्यिकी संतुलन पर बड़ा संकल्प

गृह मंत्री ने देश की सीमाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि त्रिपुरा, बंगाल और बिहार जैसे सीमावर्ती राज्यों में किसी भी तरह का जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) नहीं होने दिया जाएगा। यह सरकार का अटूट संकल्प है।

उन्होंने माना कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं की चुनौतियाँ बेहद जटिल हैं। कहीं नशीले पदार्थों की तस्करी है, कहीं मानव तस्करी, तो कहीं अवैध हथियारों और जाली नोटों का जाल। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार की रणनीति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा:

स्मार्ट बॉर्डर का निर्माण: सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य बनाने के लिए आधुनिक तकनीक (Technology) और जवानों की क्षमता को जोड़ा जा रहा है।

चतुष्कोणीय सुरक्षा चक्र: स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर एक मजबूत और चौतरफा सुरक्षा रणनीति पर काम चल रहा है।

जवानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध सरकार

अमित शाह ने भावुक होते हुए कहा कि यदि बैरक में लगी एक छोटी सी ट्यूबलाइट भी जवानों की जिंदगी को आसान बनाती है, तो वे उसके लिए भी समय देने को तैयार हैं। सरकार सीमा प्रहरियों की हर सुख-सुविधा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रख रही है।

भाषण के अंत में उन्होंने जवानों के प्रति आभार जताते हुए कहा, “मैं हमेशा कहता हूं कि देश की जनता और स्वयं गृह मंत्री रात में चैन की नींद इसलिए सो पाते हैं, क्योंकि हमारे जांबाज प्रहरी कड़ाके की ठंड और तपती गर्मी में रात भर जागकर सीमाओं पर पहरा देते हैं। पूरा देश और गृह मंत्रालय आपके इस समर्पण को सलाम करता है।”

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