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भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय : रक्षा, डिजिटल पेमेंट और ईवीएम तकनीक पर हुए ऐतिहासिक समझौते

नई दिल्ली (एजेंसी)। नई दिल्ली और जकार्ता के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में कई बड़े समझौतों पर मुहर लगी है। दोनों लोकतांत्रिक देशों ने रक्षा, तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक क्षेत्रों में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों का यह गठबंधन आपसी विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों पर टिका है, जो आने वाले समय में रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

प्रमुख समझौतों और सहयोग के मुख्य बिंदु:

चुनावी तकनीक का आदान-प्रदान (EVM): भारतीय निर्वाचन प्रणाली और तकनीक को वैश्विक मंच पर बड़ी कामयाबी मिली है। भारत अब इंडोनेशिया की आवश्यकताओं के अनुसार विशेष रूप से तैयार की गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) विकसित करने में मदद करेगा।

रक्षा क्षेत्र में मजबूती (ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल): सामरिक सुरक्षा को बढ़ावा देते हुए इंडोनेशिया ने भारत से ‘अस्त्र’ मिसाइलें खरीदने का फैसला किया है। इसके साथ ही, इंडोनेशिया अपने बेड़े में मौजूद ‘ब्रह्मोस’ मिसाइलों की संख्या बढ़ाने जा रहा है, जिसमें भारत अतिरिक्त बैटरियां और तकनीकी मदद मुहैया कराएगा।

डिजिटल पेमेंट (UPI का विस्तार): भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब इंडोनेशिया के बैंकिंग और भुगतान नेटवर्क से जुड़ेगा। इस कदम से दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और आम लोगों के लिए पैसों का लेन-देन बेहद आसान हो जाएगा।

खनिज और इस्पात उद्योग में निवेश: औद्योगिक सहयोग को बढ़ाते हुए दोनों देश स्टील, निकेल और रेयर अर्थ (दुर्लभ पृथ्वी) खनिजों की सप्लाई चेन मजबूत करेंगे। भारतीय कंपनियां इंडोनेशिया के इन क्षेत्रों में निवेश करेंगी, जिससे स्थायी चुंबक और स्टेनलेस स्टील के निर्माण को गति मिलेगी।

रणनीतिक सबांग बंदरगाह का विकास: समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मार्ग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण ‘सबांग बंदरगाह’ के साझा विकास पर दोनों नेताओं ने सहमति जताई है। मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित होने के कारण यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी अहम है।

सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति: गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दोनों देश इसे ‘टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति वर्ष’ के रूप में मनाएंगे। इसके अलावा, साझा विरासत को सहेजने के लिए योग्याकार्ता के ऐतिहासिक प्रंबानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत भी की जाएगी।

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