मातृभाषा से ही संभव है सशक्त भारत का निर्माण : भारत भवन में ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ का भव्य आगाज़

भोपाल (एजेंसी)। 14 सितंबर को भारत भवन में वीर भारत न्यास और मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि मातृभाषा केवल विचार-विमर्श का साधन नहीं, बल्कि हमारी जड़ों, संस्कृति और संस्कारों की पहचान है। युवाओं को अपनी बोली और भाषा से जुड़कर वर्ष 2047 तक भारत को समृद्ध बनाने में योगदान देना चाहिए।
इस अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का जिक्र करते हुए राज्य में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस पढ़ाई की शुरुआत को ऐतिहासिक कदम बताया गया। संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर आयोजित इस कार्यक्रम को भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक एकता का संगम करार दिया।
प्रमुख गतिविधियां एवं मुख्य आकर्षण:
19 पुस्तकों का विमोचन: कार्यक्रम में ‘भारत निधि श्रृंखला’ (महर्षि पाणिनि, पतंजलि, सम्राट राजेंद्र चोल आदि पर केंद्रित), दस गीता श्रृंखला तथा ‘युग-युगीन जल’ जैसी 19 ज्ञानवर्धक पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
वैचारिक सत्र: ‘मातृभाषा से राष्ट्रभाषा’ विषय पर केंद्रित चर्चा में विभिन्न भाषाई विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसके साथ ही भाषाई पत्रकारिता के महत्व पर भी परिचर्चा आयोजित की गई।
सांस्कृतिक संध्या एवं कवि सम्मेलन: राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में प्रसिद्ध कवियों ने अपनी काव्य रचनाओं से समां बांधा। वहीं, पूर्वरंग सत्र में उमेश तरकसवार एवं उनके दल ने लोकबोलियों और प्रांतीय भाषाओं में संगीतमय प्रस्तुतियां दीं।
विशेष प्रदर्शनी: ‘शब्द से चित्र तक’ शीर्षक से आयोजित प्रदर्शनी में भारत, नेपाल, तिब्बत और दक्षिण-पूर्व एशिया की प्राचीन चित्रित पांडुलिपियों की दुर्लभ झलक देखने को मिली।
यह आयोजन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान एवं मातृभाषा मंच के सहयोग से संपन्न हो रहा है।
















