भारत में ही प्रोसेस होगा क्लाउड AI डेटा : एंथ्रोपिक ने स्थानीय सर्वर और भारतीय भाषाओं पर केंद्रित की रणनीति

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रमुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंपनी एंथ्रोपिक ने भारतीय बाजार के लिए अपनी रणनीतिक योजनाओं का विस्तार किया है। कंपनी ने निर्णय लिया है कि उसके क्लाउड-आधारित एआई मॉडल अब भारत में स्थित इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थानीय सर्वरों के जरिए संचालित किए जाएंगे। इस व्यवस्था से भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा देश की सीमाओं के भीतर ही सुरक्षित और प्रोसेस रहेगा।
स्थानीय प्रोसेसिंग और डेटा सुरक्षा पर जोर
कंपनी के इस कदम से “इन-कंट्री इन्फेरेंस” (In-Country Inference) प्रणाली लागू होगी, जिसके तहत डेटा को प्रोसेसिंग के लिए विदेश भेजने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इसका सीधा फायदा बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य क्षेत्र और सरकारी विभागों जैसे संवेदनशील व विनियमित (regulated) क्षेत्रों को मिलेगा, जहाँ डेटा गोपनीयता और सुरक्षा नियम बेहद सख्त होते हैं।
तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार पर ध्यान
एंथ्रोपिक के अनुसार, भारत क्लाउड-बेस्ड एआई तकनीकों को अपनाने वाले दुनिया के सबसे तेजी से विकसित होते बाजारों में से एक है। देश में सुदृढ़ होते डिजिटल ढांचे और तकनीकी विकास को देखते हुए कंपनी यहाँ एंटरप्राइज एआई सॉल्यूशंस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही है।
5,000 से अधिक पेशेवरों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
कंपनी अपने पार्टनर नेटवर्क को भी मजबूत बना रही है, जिसमें भारत से सबसे अधिक रजिस्ट्रेशन देखने को मिले हैं। इस पहल के तहत 5,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों को एआई तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे आईटी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और अन्य उद्योगों को कुशल मानव संसाधन मिल सकेंगे।
भारतीय भाषाओं और साइबर सुरक्षा पर फोकस
एंथ्रोपिक की आगामी योजनाओं में शामिल हैं:
कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना: भारत में अपनी टीमों का विस्तार करना।
स्थानीय भाषाएं: भारतीय भाषाओं में एआई मॉडल्स की दक्षता बढ़ाना, ताकि आम नागरिक भी अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में एआई सेवाओं का लाभ उठा सकें।
साइबर सुरक्षा व डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: एआई आधारित सुरक्षा जांच, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे भुगतान प्रणाली और पहचान सेवाएं) को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाना।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर डेटा प्रोसेसिंग और कौशल विकास की यह पहल भारत में एक सुरक्षित, विश्वसनीय और स्थानीय जरूरतों के अनुकूल एआई इकोसिस्टम तैयार करने में मददगार साबित होगी।














