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गहलोत का छलका दर्द : बोले ‘सोनिया गांधी मुझे ही सौंपना चाहती थीं कमान, पर मैं साजिश का शिकार हो गया’

जयपुर (एजेंसी)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस आलाकमान और सोनिया गांधी उन्हें ही पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के पक्ष में थीं, लेकिन एक सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें इस दौड़ से बाहर कर दिया गया।

पत्रकारों से चर्चा के दौरान गहलोत ने कहा कि वे इस पद की गरिमा और इसके गौरवशाली इतिहास से भली-भांति वाकिफ हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पंडित नेहरू, मोतीलाल नेहरू और सरदार पटेल जैसी महान शख्सियतें इस कुर्सी पर बैठ चुकी हैं। गहलोत ने सवाल उठाया कि अगर सोनिया गांधी उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी दे रही थीं, तो वे भला उसे क्यों ठुकराते? उन्होंने आरोप लगाया कि अचानक पर्यवेक्षकों (ऑब्जर्वर्स) को भेजकर एक नाटक रचा गया, जिससे उनकी छवि को भारी नुकसान पहुँचाया गया।

‘साजिश के कारण देश में बनी गलत धारणा’

अशोक गहलोत ने इस बात पर दुख जताया कि पूरे देश में यह गलत संदेश गया कि वे मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए बगावत की। सच्चाई बयां करते हुए उन्होंने कहा:

“मैं देश की जनता को असलियत कैसे समझाता? इसलिए मैं खामोश रहा। मैं तो बस सोनिया गांधी को यह भरोसा दिलाना चाहता था कि सचिन पायलट या किसी और के विरोध से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। संकट यह था कि विधायक दल का नेता होने के बावजूद मैं पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में प्रस्ताव पारित नहीं करवा सका। इसी बात का खेद जताने मैं खुद सोनिया जी के पास गया था और मुझे उस पूरे घटनाक्रम का आज भी पछतावा है।”

सचिन पायलट को दी नसीहत

राजनीति के समीकरणों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी आलाकमान सूबे का नेतृत्व बदलने का फैसला करता है, तो हवा का रुख बदलते देर नहीं लगती। उन्होंने उदाहरण दिया कि साल 2022 में जो 91 विधायक कल तक उनके साथ खड़े थे, वे पलक झपकते ही दूसरे पाले में चले गए। गहलोत ने कहा कि यह एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जिसे सचिन पायलट को भी अब समझ लेना चाहिए, क्योंकि उन्हें राजनीति में अच्छा-खासा समय हो चुका है।

अंत में गहलोत ने दोहराया कि वे हमेशा कांग्रेस के प्रति वफादार रहे हैं और पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि उस दौरान अचानक बदले घटनाक्रम ने उनकी छवि को धूमिल करने का काम किया। गहलोत के इस ताजा बयान ने राजस्थान कांग्रेस के भीतर की अंदरूनी कलह और पुरानी अदावत को एक बार फिर हवा दे दी है।

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