सोने की कीमतों में भारी उछाल के आसार : 2028 तक दो लाख रुपये के पार जा सकता है भाव

न्यूज़ डेस्क (एजेंसी)। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सोने के बाजार को लेकर एक बड़ी और अहम रिपोर्ट सामने आई है। फाइनेंशियल टाइम्स में छपि एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने का स्टॉक बढ़ाए जाने और सुरक्षित निवेश के रूप में इसकी बढ़ती मांग के कारण आने वाले कुछ वर्षों में सोने के दाम रिकॉर्ड स्तर को छू सकते हैं। अनुमान जताया जा रहा है कि साल 2028 तक भारतीय बाजार में सोने की कीमत 2,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार कर सकती है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से मिल रहा है बल
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों ने केवल सितंबर के महीने में लगभग 63 टन सोने की खरीदारी की है। नवंबर 2024 के बाद से किसी एक महीने में यह सबसे बड़ी खरीदारी दर्ज की गई है। इसके अलावा, सरकारी बॉन्ड से जुड़े जोखिम, अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में उतार-चढ़ाव और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के चलते निवेशकों का रुझान तेजी से सोने की तरफ बढ़ रहा है।
वैश्विक और घरेलू बाजार का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बात करें तो, हाल ही में कॉमेक्स पर सोना और चांदी दोनों में ही रिकवरी देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर सोने के दाम सुधरकर 4,177 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहे हैं, जबकि चांदी भी बढ़त के साथ 57 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई है।
हालांकि, इसके उलट हाल ही में घरेलू (भारतीय) बाजार में कुछ नरमी देखने को मिली थी। दिल्ली सर्राफा बाजार में पिछले कुछ सत्रों के दौरान सोने के भाव में गिरावट दर्ज की गई थी और यह घटकर लगभग 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था, जबकि चांदी भी फिसलकर 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास दर्ज की गई थी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की मजबूती और तात्कालिक मांग में कमी के कारण घरेलू स्तर पर यह गिरावट आई थी।
निवेशकों के लिए क्या है खास संदेश?
विशेषज्ञों का कहना है कि 2028 तक सोने के भाव 2 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान मुख्य रूप से दीर्घकालिक वैश्विक रुझानों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर आधारित है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बदलाव, वैश्विक मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा बाजार की चाल जैसे कारक इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए, इस आंकड़े को एक संभावित अनुमान के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी तयशुदा गारंटी के रूप में।
















