इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर : मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्रांति का नया अध्याय

भोपाल (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 मई, 2026 को इंदौर के नैनोद गाँव में ‘इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर’ के प्रथम चरण का भूमि-पूजन किया। लगभग 2360 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना राज्य को निवेश, रोजगार और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में एक नई ऊँचाई पर ले जाने के लिए तैयार है।
विकास का ‘महायज्ञ’ और किसानों की भागीदारी
मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को न केवल एक सड़क या कॉरिडोर, बल्कि ‘नये मध्यप्रदेश’ के निर्माण में मील का पत्थर बताया। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता सरकार और किसानों के बीच का अनूठा सामंजस्य है। सरकार ने किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए एक ऐतिहासिक मॉडल अपनाया है:
विकसित भूमि का लाभ: किसानों की जमीन का अधिग्रहण करने के बजाय उन्हें इस विकास प्रक्रिया में साझीदार बनाया गया है, जिसके तहत उन्हें 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस दी जा रही है।
उचित मुआवजा: प्रभावित किसानों को गाइडलाइन मूल्य का चार गुना मुआवजा देने का निर्णय लिया गया है, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।
जन-भागीदारी: इस परियोजना के लिए किसानों ने स्वयं आगे आकर सहमति पत्र दिए, जो राज्य में विश्वास और विकास के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।
परियोजना की मुख्य तकनीकी विशेषताएं
यह कॉरिडोर इंदौर की वाणिज्यिक ऊर्जा और पीथमपुर की औद्योगिक क्षमता के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा। परियोजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
विशिष्टता,विवरण
कुल लागत,2360 करोड़ रुपये
क्षेत्रफल,1300 हेक्टेयर
लम्बाई,लगभग 20 किमी
सड़क की चौड़ाई,75 मीटर
संभावित रोजगार,6 लाख से अधिक (प्रत्यक्ष + अप्रत्यक्ष)
आधारभूत संरचना,”आधुनिक ड्रेनेज, डेटा सेंटर, ग्रीन इंडस्ट्रीज, जल आपूर्ति”
प्रदेश के औद्योगिक भविष्य के लिए एक ‘गेट-वे’
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, यह कॉरिडोर राज्य के औद्योगिक विकास के लिए एक ‘गेट-वे’ की तरह है। इसके माध्यम से:
कनेक्टिविटी: यह कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़कर एक मजबूत आर्थिक गलियारे का निर्माण करेगा।
लॉजिस्टिक्स में सुधार: आधुनिक सड़कों और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के कारण उद्योगों की उत्पादन लागत में भारी कमी आएगी।
रोजगार सृजन: लगभग 6 लाख युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, जिसमें आईटी सेक्टर से लेकर ग्रीन एनर्जी तक के क्षेत्र शामिल हैं।
औद्योगिक विस्तार का संकल्प
राज्य सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाना है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में इस कॉरिडोर के अलावा 1700 किमी लंबे 6 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क और नर्मदा व विंध्य जैसे बड़े प्रगति पथों पर तेजी से काम चल रहा है। यह पूरी योजना आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब और नेशनल इंडस्ट्रियल हब के रूप में स्थापित करने के लिए एक दूरदर्शी कदम है।
इस अवसर पर वरिष्ठ मंत्रीगण, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय किसान उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक पहल का स्वागत किया। यह परियोजना निश्चित रूप से इंदौर, धार, उज्जैन और देवास क्षेत्र को औद्योगिक ‘पेंटागन’ के रूप में उभरने में मदद करेगी।
















