कोरबा के गनगेई में हरियाली की नई इबारत : 20 हजार पौधों से महका इलाका

कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कोरबा जिले के कुसमुंडा परिक्षेत्र स्थित ग्राम गनगेई में एक व्यापक वृक्षारोपण अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है, जिसने न केवल क्षेत्र की सूरत बदल दी है बल्कि ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार के नए द्वार भी खोले हैं।
अभियान की मुख्य झलकियां
औद्योगिक वृक्षारोपण मंडल के सहयोग से चलाए गए इस प्रोजेक्ट की खास बातें नीचे दी गई हैं:
क्षेत्रफल: लगभग 10 हेक्टेयर राजस्व भूमि।
कुल पौधे: 20,000 से अधिक वृक्षों का रोपण।
विविधता: इस अभियान में केवल छायादार ही नहीं, बल्कि फलदार और औषधीय पौधों पर भी जोर दिया गया है। इसमें आम, जामुन, आंवला, कटहल, अमरूद, मुनगा (सहजन), शीशम, बांस, पीपल और बरगद जैसी कई प्रजातियां शामिल हैं।
नवाचार: खदान क्षेत्र में जगह की कमी के कारण गांव की खाली पड़ी राजस्व भूमि का सदुपयोग किया गया।
चुनौतियां और सामुदायिक सहभागिता
शुरुआत में इस परियोजना को लेकर ग्रामीणों के मन में कुछ शंकाएं थीं। उन्हें डर था कि वृक्षारोपण के बाद वे अपनी जमीन का हक खो देंगे या पशुओं के लिए चारे की कमी हो जाएगी।
समाधान: वन विभाग ने ग्राम पंचायत के साथ बैठकें कीं और स्पष्ट किया कि 5 साल बाद यह विकसित क्षेत्र वापस पंचायत को सौंप दिया जाएगा। विभाग ने ग्रामीणों को समझाया कि इन पेड़ों से उन्हें भविष्य में फल, जलाऊ लकड़ी और चारा तो मिलेगा ही, साथ ही गांव का जलस्तर भी सुधरेगा। इस भरोसे के बाद ग्रामीणों ने इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
आज गनगेई का यह क्षेत्र पूरी तरह हरा-भरा हो चुका है। इस सफल अभियान के कई सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं:
मिट्टी का संरक्षण: पेड़ों की जड़ों से मिट्टी का कटाव रुका है।
जल पुनर्भरण: वर्षा का जल अब सीधे बहने के बजाय जमीन के भीतर समा रहा है।
तापमान में गिरावट: सघन हरियाली के कारण भीषण गर्मी में भी गांव के तापमान में राहत महसूस की जा रही है।
जैव विविधता: क्षेत्र में पक्षियों और छोटे जीवों का बसेरा बढ़ा है।
रोजगार: रोपण से लेकर रखरखाव के कार्यों में स्थानीय लोगों को काम मिला, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
















