शिक्षा के अधिकार में डिजिटल क्रांति, 14 हजार से अधिक बच्चों का हुआ चयन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के लोकतांतिकीकरण और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘शिक्षा का अधिकार’ (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन लॉटरी का शुभारंभ किया। इस पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से राज्य के 14,403 बच्चों का चयन निजी शिक्षण संस्थानों में निःशुल्क शिक्षा हेतु किया गया है।
चयन प्रक्रिया के मुख्य आंकड़े
मंत्रालय महानदी भवन से आयोजित इस वर्चुअल कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर लॉटरी निकाली। इस वर्ष के प्रवेश सत्र की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
कुल आवेदन: 38,439
पात्र पाए गए आवेदन: 27,203
प्रथम चरण में चयनित छात्र: 14,403
बजट आवंटन: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शुल्क प्रतिपूर्ति हेतु 300 करोड़ रुपये का प्रावधान।
मुख्यमंत्री का विजन : “शिक्षा पर सबका समान हक”
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि आर्थिक तंगी किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे के भविष्य के आड़े नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा:
“गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रत्येक बालक का बुनियादी हक है। हमारी सरकार तकनीक और पारदर्शिता के माध्यम से यह सुनिश्चित कर रही है कि समाज के सबसे निचले तबके का बच्चा भी राज्य के बेहतरीन निजी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर सके।”
तकनीक से आई पारदर्शिता
इस पूरी प्रक्रिया को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है:
जियो-मैपिंग आधारित चयन: आवेदन करते समय अभिभावकों को उनके निवास से 1.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्कूलों की सूची और वहां उपलब्ध सीटों की जानकारी स्वतः मिल जाती है।
डिजिटल सत्यापन: आवेदन से लेकर लॉटरी तक की सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संपन्न की गईं।
समावेशी प्राथमिकता: चयन में अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग और आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़े वर्गों को नियमानुसार प्राथमिकता दी गई है।
भावी योजना
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में RTE के तहत 3.63 लाख से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। जिन विद्यालयों में प्रथम चरण के बाद सीटें रिक्त रह गई हैं, वहां जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी आयोजित की जाएगी। इसकी विस्तृत जानकारी शिक्षा विभाग के आधिकारिक RTE पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।
शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुई यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ में एक समावेशी और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
















