वरुण धवन और डेविड धवन की जुगलबंदी : क्या ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में है पुराना जादू?

मुंबई (एजेंसी)। जब भी बॉलीवुड में उलझे हुए रिश्तों, दोहरी भूमिकाओं और पेट खोलकर हंसाने वाले पारिवारिक ड्रामे का जिक्र होता है, तो निर्देशक डेविड धवन का नाम सबसे ऊपर आता है। ‘जुड़वा’ और ‘बीवी नंबर 1’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से दशकों तक दर्शकों का मनोरंजन करने के बाद, डेविड धवन ने एक बार फिर निर्देशन की कमान संभाली है। इस बार वह अपने बेटे वरुण धवन के साथ एक नई कल्ट-कॉमेडी ‘है जवानी तो इश्क होना है’ लेकर आए हैं। चर्चा यह भी है कि यह उनके शानदार फिल्मी सफर की आखिरी फिल्म हो सकती है।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यह फिल्म डेविड धवन के उसी पुराने सुनहरे दौर का अहसास कराती है, या फिर यह बीते जमाने के घिसे-पिटे फॉर्मूले को दोबारा परोसने की एक नाकाम कोशिश है?
कथानक: उलझी हुई राहें और कॉमेडी का तड़का
फिल्म की पटकथा मुख्य किरदार जस (वरुण धवन) के इर्द-गिर्द बुनी गई है। जस अपनी पत्नी बानी (मृणाल ठाकुर) के साथ एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी और परिवार की शुरुआत करना चाहता है। हालांकि, बानी के लिए उसका करियर पहली प्राथमिकता है। विचारों के इसी टकराव के कारण दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं और बात जल्द ही कानूनी अलगाव (तलाक) तक पहुंच जाती है। इसके बाद कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं जहां से गलतफहमियां और कॉमेडी का सफर शुरू होता है।
















