छत्तीसगढ़

शहरी विकास में स्थानीय ज़रूरतों को मिलेगी प्राथमिकता, नई दिल्ली में बोरा की अहम बैठकें

रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरों के विकास को एक नई दिशा देने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठकों और कार्यशालाओं में हिस्सा लिया। हुडको (HUDCO) द्वारा ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) पर आयोजित क्षमता विकास कार्यशाला में बोलते हुए बोरा ने स्पष्ट किया कि किसी भी शहर का ढांचा उसकी भौगोलिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक प्रकृति को ध्यान में रखकर ही तैयार किया जाना चाहिए।

कार्यशाला में शामिल हुए विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केवल बजटीय प्रावधान काफी नहीं हैं, बल्कि मजबूत नियोजन, संस्थागत क्षमता निर्माण और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर समन्वय से ही दूरगामी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

केंद्रीय सचिव और हुडको अधिकारियों के साथ रणनीतिक मंथन

अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान श्री बोरा ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव सतेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में छत्तीसगढ़ में संचालित प्रमुख केंद्र पोषित योजनाओं—जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, अमृत योजना, पीएम स्वनिधि, पीएम ई-बस सेवा और अर्बन चैलेंज फंड—की वर्तमान प्रगति तथा भावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

इसके बाद, उन्होंने हुडको के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुलश्रेष्ठ और उनकी तकनीकी टीम के साथ एक विशेष बैठक की। इस चर्चा का मुख्य बिंदु राज्य के औद्योगिक, धार्मिक, पर्यटन, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहरों की विशिष्ट पहचान को बनाए रखते हुए वहां बुनियादी ढांचा विकसित करना रहा।

इन प्रमुख पहलुओं पर हुआ विचार:

प्रोजेक्ट आधारित विकास: शहरों में आवश्यकतानुसार फूड पार्क, स्लम पुनर्विकास, रेंटल हाउसिंग, पर्यटन संवर्धन और ‘ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (TOD) को मास्टर प्लान का हिस्सा बनाना।

बेस्ट प्रैक्टिसेज का समावेश: देश के अन्य राज्यों में सफल रहे मॉडल और नीतियों का अध्ययन कर उन्हें छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों के अनुकूल लागू करना।

वित्तीय अभिसरण (Convergence): केंद्र और राज्य की योजनाओं के बजट का एकीकृत उपयोग कर वित्तीय दक्षता बढ़ाना।

हुडको देगा तकनीकी और वित्तीय सहायता

बैठक के दौरान हुडको प्रबंधन ने छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों के अधिकारियों के लिए राज्य स्तर पर ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही, नई परियोजनाओं के लिए ‘प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट’ (PPR) तैयार करने, तकनीकी मार्गदर्शन देने और आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

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