बस्तर में ढह रहा है माओवाद का किला : देवजी के बाद खूंखार नक्सली मल्लेश ने भी डाले हथियार

बस्तर। छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर में नक्सली संगठन को एक और करारा झटका लगा है। हाल ही में संगठन के बड़े नेता देवजी के आत्मसमर्पण के बाद, अब एक और ‘डिविजनल कमेटी मेंबर’ (DVCM) मल्लेश ने सुरक्षा बलों के सामने घुटने टेक दिए हैं। मल्लेश ने अपनी एके-47 राइफल के साथ कांकेर जिले के छोटेबेठिया स्थित बीएसएफ कैंप पहुंचकर सरेंडर किया।
प्रमुख घटनाक्रम: ग्रामीणों की मदद से पहुंचा कैंप
लंबे समय से सुरक्षा बलों की रडार पर रहे मल्लेश को पकड़ने के लिए जवान लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। बताया जा रहा है कि स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से मल्लेश कैंप तक पहुंचने में सफल रहा। उसके पास से एक एके-47 और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद हुआ है। पुलिस इसे क्षेत्र में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मान रही है।
क्यों बिखर रहा है संगठन?
नक्सली संगठन के महासचिव देवजी द्वारा हथियार डालने के बाद से ही बस्तर के जंगलों में सक्रिय कैडरों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के टूटने से निचले स्तर के लड़ाकों का मनोबल पूरी तरह गिर चुका है।
वर्तमान स्थिति की मुख्य बातें:
घटती संख्या: उत्तर बस्तर के इलाके में अब सक्रिय नक्सलियों की संख्या घटकर महज 23 रह गई है।
प्रमुख कमेटियों का सफाया: हाल ही में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हुई मुठभेड़ में कंपनी नंबर-5 के कमांडर फागु और जोगी के मारे जाने से संगठन कमजोर हुआ है।
आत्मसमर्पण की कतार: सूत्रों के अनुसार, कई अन्य नक्सली भी सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने की योजना बना रहे हैं।
कांकेर में अब कौन है सक्रिय?
भले ही नक्सलियों की संख्या कम हुई है, लेकिन सुरक्षा बल अभी भी सतर्क हैं। वर्तमान में कांकेर के परतापुर एरिया कमेटी और कंपनी नंबर-5 में कुछ नाम अभी भी सक्रिय हैं:
चंद्र कतलाम (DVCM)
रूपी रेड्डी (ACM)
कुमारी माली (ACM)
मंगेश परचाकी (ACM)
मंगलू पद्दा (ACM)
मनीषा कोर्राम (ACM)
सुरक्षा बलों का मानना है कि जिस तरह से आत्मसमर्पण का सिलसिला शुरू हुआ है, जल्द ही बस्तर का यह इलाका पूरी तरह नक्सल मुक्त हो जाएगा।
















