मध्यप्रदेश

सनातन संस्कार और सेवा ही मानवता का असली धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भीलवाड़ा एजेंसी। भीलवाड़ा (राजस्थान) में आयोजित ‘सनातन मंगल महोत्सव’ एवं संत समागम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति की महानता, सेवा भाव और आगामी सिंहस्थ कुंभ 2028 पर अपने विचार साझा किए।

‘वसुधैव कुटुंबकम्’ हमारी संस्कृति का आधार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्वतजनों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति केवल स्वयं के उत्थान की बात नहीं करती, बल्कि यह “स्व से सृष्टि तक” के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि:

परोपकार ही धर्म है: केवल अपने लिए जीना जीवन नहीं है; पशु-पक्षी, प्रकृति और संपूर्ण चराचर जगत की सेवा ही वास्तविक ‘श्रीहरि’ की सेवा है।

सांस्कृतिक एकता: राजस्थान (‘रा’) और मध्यप्रदेश (‘म’) मिलकर ‘राम’ नाम की महिमा को सार्थक कर रहे हैं।

तीर्थ विकास: मध्यप्रदेश सरकार भगवान राम और कृष्ण के चरणों से पवित्र हुए स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित कर रही है, जिसके अंतर्गत ‘श्रीरामचन्द्र गमन पथ’ और ‘श्री कृष्ण पाथेय’ पर तेजी से काम जारी है।

संतों का मार्गदर्शन और सामाजिक समरसता

डॉ. यादव ने समाज निर्माण में संतों की भूमिका को अपरिहार्य बताया। उन्होंने हरिशेवा उदासीन आश्रम के स्वामी हंसरामजी महाराज के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आश्रम असहायों का संबल बना हुआ है।

“धर्म केवल कर्मकांड या पूजा पद्धति नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक कला है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को वेदों का ज्ञान और नैतिक संस्कार देने होंगे ताकि भारत पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन हो सके।”

सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के लिए आमंत्रण

मुख्यमंत्री ने उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब मोक्षदायिनी शिप्रा के तट पर यह महापर्व आयोजित होता है। उन्होंने भीलवाड़ा की पावन धरा से देश-विदेश के समस्त साधु-संतों को इस महाकुंभ में पधारने और श्रद्धालुओं को अपने ज्ञान के अमृत से अभिसिंचित करने का विनम्र निमंत्रण दिया।

दीक्षा महोत्सव और अन्य विशिष्ट जन

कार्यक्रम के दौरान तीन युवा संतों—श्री ईशानराम जी, श्री केशवराम जी और श्री सुमज्ञराम जी—को संन्यास की दीक्षा दिलाई गई, जिनका मुख्यमंत्री ने अभिनंदन किया।

गौतम कुमार दक (सहकारिता राज्यमंत्री, राजस्थान): उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करोड़ों भारतीयों के 500 वर्षों के स्वप्न के साकार होने जैसा है।

बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज (राज्यसभा सांसद): उन्होंने सामाजिक समरसता और ‘सबका साथ-साथ विकास’ के संकल्प पर बल देते हुए बच्चों को बचपन से ही संतों के सानिध्य में भेजने का आग्रह किया।

इस भव्य समागम में भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल, ज्ञानेश्वरी दीदी और देश भर के प्रतिष्ठित आश्रमों के महामंडलेश्वर व महंत उपस्थित रहे।

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