परमाणु संवर्धन अधिकारों पर ईरान का कड़ा रुख : ‘समझौते का सवाल ही नहीं’

तेहरान (एजेंसी)। ईरान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने घोषणा की है कि देश अपने यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के वैध अधिकारों पर किसी भी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं है।
बाघेई ने जोर देकर कहा कि परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग ईरान का बुनियादी अधिकार है, जो परमाणु अप्रसार संधि (NPT) और अंतरराष्ट्रीय कानूनों द्वारा संरक्षित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अधिकार किसी बाहरी देश द्वारा दी गई कोई ‘खैरात’ नहीं है, जिसे दबाव बनाकर छीना जा सके।
संधि और अधिकार: बाघेई के अनुसार, जब तक ईरान NPT का हिस्सा है, उसे संधि के सभी लाभ और अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने पश्चिमी मीडिया में चल रही उन खबरों को भी खारिज किया जिनमें ईरान के झुकने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
अमेरिका के साथ वार्ता: पाकिस्तान में हाल ही में हुई ईरान-अमेरिका चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी ठोस नतीजे पर पहुँचने से पहले एक मजबूत बुनियादी ढांचे (Framework) की आवश्यकता है। बिना शर्तों के संवेदनशील मुद्दों पर जल्दबाजी में बात करना मुमकिन नहीं है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिरोध: प्रवक्ता ने ‘लेबनान प्रतिरोध’ के प्रति ईरान के निरंतर समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल लगातार संघर्षविराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि दूसरा पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं को तोड़ता है, तो ईरान भी अपनी जिम्मेदारियों को बदलने का अधिकार रखता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): यूरोपीय देशों के सुरक्षा प्रस्तावों पर टिप्पणी करते हुए बाघेई ने कहा कि ईरान और उसके पड़ोसी क्षेत्रीय जलमार्गों की सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं और इसके लिए बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
संक्षेप में: ईरान ने साफ़ कर दिया है कि वह अपनी परमाणु तकनीक और संवर्धन क्षमता को अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता का हिस्सा मानता है और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद अपने रुख पर कायम रहेगा।
















