मध्यप्रदेश

ओंकारेश्वर में ‘एकात्म पर्व’ का आगाज़ : आदि शंकराचार्य का अद्वैत दर्शन बनेगा वैश्विक एकता का सूत्र

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य के जन्मोत्सव ‘एकात्म पर्व’ का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ओंकारेश्वर को ज्ञान और चेतना का केंद्र बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की पावन धरा ने सदैव से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को नई ऊर्जा प्रदान की है।

प्रमुख बिंदु और उपलब्धियां

पुस्तकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का विमोचन: मुख्यमंत्री ने श्री रोहन अच्युत कुलकर्णी द्वारा रचित ग्रंथ “वेदांतसिद्धान्तचन्द्रिका विथ उदग्र” का विमोचन किया। साथ ही, एकात्म धाम की भविष्य की योजनाओं और अद्वैत दर्शन पर आधारित आधिकारिक वेबसाइट oneness.mp.gov.in का लोकार्पण भी किया गया।

ओंकारेश्वर: ग्लोबल सेंटर ऑफ वननेस: मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ओंकारेश्वर को एकात्मता के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ ₹2400 करोड़ की लागत से ‘अद्वैत लोक’ संग्रहालय का निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है।

आधुनिक पीढ़ी और अद्वैत: डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में सनातन मूल्यों के साथ समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। ‘एकात्म पर्व’ नई पीढ़ी को अद्वैत वेदांत की गहराई से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है।

संतों का मार्गदर्शन और सांस्कृतिक गौरव

इस पांच दिवसीय महोत्सव में द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती महाराज ने शिरकत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा:

“एकात्मता का अर्थ है हर जीव में परमात्मा के दर्शन करना। जब व्यक्ति अपनी आत्मा से साक्षात्कार करता है, तभी वह वास्तविक शांति प्राप्त कर सकता है।”

विवेकानंद केंद्र की सुश्री निवेदिता भिड़े ने आधुनिक विज्ञान (क्वांटम फिजिक्स) और वेदों के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुनिया को मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए भारतीय उपनिषदों की शरण में आना ही होगा।

भविष्य की रूपरेखा

एकात्म यात्रा (2027): सिंहस्थ-2028 से पूर्व, जनवरी 2027 में आदि शंकराचार्य के जन्मस्थान (केरल) से एक विशेष एकात्म यात्रा निकाली जाएगी।

शंकर दूत: 21 अप्रैल को समापन समारोह में देश-विदेश के 700 से अधिक युवा ‘शंकर दूत’ के रूप में समाज सेवा और आध्यात्मिक प्रचार का संकल्प लेंगे।

वैचारिक सत्र: महोत्सव के दौरान ‘अद्वैत एवं Gen-Z’ जैसे समकालीन विषयों पर चर्चा होगी, जिसमें एआई (AI) और अध्यात्म के संबंध पर भी विमर्श किया जाएगा।

यह आयोजन 21 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगा, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से सनातन संस्कृति का वैभव प्रदर्शित किया जाएगा।

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