छत्तीसगढ़

आत्मनिर्भरता की नई मिसाल : बिहान योजना ने संवारी इंद्रनिया बाई की किस्मत

रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिला सशक्तिकरण की गूँज अब धरातल पर दिखाई देने लगी है। शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएँ न केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रही हैं, बल्कि सफलता के नए आयाम भी स्थापित कर रही हैं। इसी बदलाव की एक जीती-जागती तस्वीर गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले के ग्राम लालपुर में देखने को मिली है, जहाँ श्रीमती इंद्रनिया बाई ने अपनी मेहनत से ‘लखपति दीदी’ बनने का गौरव हासिल किया है।

ऋण से शुरू हुआ स्वावलंबन का सफर

लक्ष्मी स्वसहायता समूह की सदस्य इंद्रनिया बाई के जीवन में बड़ा बदलाव बिहान योजना के माध्यम से आया। उन्होंने अपने व्यवसाय को विस्तार देने के लिए योजना के तहत 1 लाख 85 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया और बकरी पालन के क्षेत्र में कदम रखा। शुरुआत में संसाधन भले ही कम थे, लेकिन उनके इरादे और संकल्प में कोई कमी नहीं थी।

25 पशुओं का कुनबा और शानदार कमाई

इंद्रनिया बाई ने पारंपरिक ढर्रे से हटकर वैज्ञानिक और सूझबूझ भरे तरीके से पशुपालन को अपनाया। वर्तमान में उनके पास:

सिंगरौली और तोतापुरी जैसी उन्नत देशी नस्लें उपलब्ध हैं।

कुल 25 बकरे-बकरियों का वे कुशलतापूर्वक पालन कर रही हैं।

उनकी वार्षिक आय अब 1.50 लाख रुपये के पार पहुँच गई है।

भविष्य की योजना: आधुनिकता और नई नस्लें

अपनी इस सफलता को वह यहीं रोकना नहीं चाहतीं। इंद्रनिया बाई अब अपने व्यवसाय को आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी में हैं। वे एक हाइजीनिक पशु शेड का निर्माण करना चाहती हैं और साथ ही उत्पादन बढ़ाने के लिए सिरोटी अजमेर नस्ल की बकरियों को अपने बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य रखा है।

सरकारी योजनाओं का मिल रहा संबल

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। बिहान जैसी योजनाएँ महिलाओं को केवल कर्ज नहीं, बल्कि समाज में एक नई पहचान और आत्मसम्मान दे रही हैं। इंद्रनिया बाई की यह कहानी साबित करती है कि यदि सरकारी सहयोग और व्यक्तिगत परिश्रम मिल जाए, तो सफलता की राह आसान हो जाती है।

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