छत्तीसगढ़

पसरबानी क्षेत्र में फसल विविधीकरण : धान के विकल्प से समृद्ध होते किसान

रायपुर। पिथौरा विकासखंड का परसरबानी क्षेत्र इन दिनों खेती के एक नए मॉडल के रूप में उभर रहा है। पारंपरिक रूप से धान पर निर्भर रहने वाले यहाँ के किसान अब राज्य सरकार और कृषि विभाग के सहयोग से दलहन (दालें) और तिलहन की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मज़बूत कर रहा है।

20 गाँवों में बदला खेती का स्वरूप

पिछले तीन वर्षों में डोडरकसा, डोगरीपाली और गौरिया सहित लगभग 20 गाँवों के किसानों ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। इस वर्ष परसबानी और छोटेलोरम संकुल के करीब 120 से 150 एकड़ क्षेत्र में मूंग और सरसों की बुवाई की गई है।

इस कृषि परिवर्तन के मुख्य लाभ:

जल संरक्षण: धान की तुलना में मूंग और सरसों को बहुत कम सिंचाई की आवश्यकता होती है, जिससे गिरते भू-जल स्तर को थामने में मदद मिल रही है।

मिट्टी का स्वास्थ्य: दलहन फसलें (जैसे मूंग, उड़द और अरहर) प्राकृतिक रूप से मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) करती हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है।

बेहतर मुनाफा: बाजार में दालों और तिलहन की बढ़ती मांग के कारण किसानों को धान की तुलना में अधिक और जल्दी मुनाफा मिल रहा है।

विशेषज्ञ मार्गदर्शन और सरकारी सहायता

कृषि विभाग का आगामी लक्ष्य क्षेत्र में मूंगफली, सरसों और मौसमी सब्जियों के रकबे को और बढ़ाना है। अधिकारियों को विश्वास है कि यदि यह रुझान जारी रहा, तो पसरबानी जल्द ही जिले का दलहन-तिलहन हब बन जाएगा।

किसानों को इस सफर में अकेला नहीं छोड़ा गया है। विभाग द्वारा उन्हें निम्नलिखित सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं:

उन्नत किस्म के बीज और खाद।

कीटनाशक और आधुनिक कृषि यंत्र (जैसे पावर स्प्रेयर)।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि: योजना के तहत मिलने वाली ₹6,000 की वार्षिक सहायता राशि किसानों के लिए खाद-बीज की लागत निकालने में मददगार साबित हो रही है।

“अब हमें मूंग और उड़द जैसी फसलों से न केवल अच्छी आय हो रही है, बल्कि समय की भी बचत होती है। सरकारी मदद मिलने से हमारा उत्साह और बढ़ा है।”
— सुग्रीव, स्थानीय किसान (ग्राम गौरिया)

भविष्य की राह

फसल चक्र (Crop Rotation) को अपनाकर किसान न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन की उर्वरता और पानी को भी सुरक्षित कर रहे हैं। भक्तचरण और मोती लाल भोई जैसे प्रगतिशील किसान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं, जिससे यह ‘कृषि क्रांति’ अब जन-आंदोलन का रूप ले रही है।

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