सुकमा की नन्ही लावण्या के चेहरे पर लौटी रौनक : मुख्यमंत्री साय ने बढ़ाया हौसला

सुकमा। सुकमा जिले की 13 वर्षीय लावण्या के लिए पिछला हफ्ता किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। जन्मजात शारीरिक चुनौती (कटे होंठ) के कारण सालों तक सामाजिक संकोच और पीड़ा झेलने वाली इस बिटिया को अब न केवल नया चेहरा मिला है, बल्कि उसका खोया हुआ आत्मविश्वास भी लौट आया है।
स्वास्थ्य शिविर ने बदली जिंदगी की राह
गोल्लापल्ली कन्या आश्रम की छात्रा लावण्या जन्म से ही ‘क्लेफ्ट लिप’ की समस्या से ग्रसित थी। जानकारी के अभाव और इलाज के डर से उसका परिवार अब तक उपचार कराने में हिचकिचा रहा था। लेकिन हाल ही में आयोजित मेगा सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य शिविर लावण्या के जीवन में उम्मीद की किरण बनकर आया।
त्वरित कार्रवाई: शिविर में डॉक्टरों ने लावण्या की स्थिति देखी और काउंसलिंग के जरिए परिवार का डर दूर किया।
सरकारी सहायता: मौके पर ही लावण्या का आयुष्मान कार्ड बनाया गया ताकि इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन कर सके।
विशेषज्ञ उपचार: बेहतर सर्जरी के लिए उसे जिला अस्पताल से रायपुर के कालाडा अस्पताल रेफर किया गया, जहाँ ‘चिरायु’ (RBSK) टीम ने उसकी पूरी देखरेख की।
सफल सर्जरी और नई शुरुआत
10 अप्रैल 2026 की तारीख लावण्या के जीवन का ऐतिहासिक दिन बनी, जब रायपुर में उसकी सफल प्लास्टिक सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद जब लावण्या ने पहली बार आइने में खुद को देखा, तो उसकी आंखों की चमक और चेहरे की मुस्कान ने वर्षों के संघर्ष को खत्म कर दिया।
जब मुख्यमंत्री ने खुद जाना हाल-चाल
लावण्या की इस नई शुरुआत पर खुशियों के रंग तब और गहरे हो गए जब 13 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुकमा प्रवास के दौरान उससे मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने बच्ची को दुलारते हुए फल भेंट किए और उसे बेहतर भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया।
“लावण्या की यह मुस्कान शासन की योजनाओं और स्वास्थ्य कर्मियों के सेवा भाव का सबसे सुंदर परिणाम है।”
योजनाओं की पहुँच का जीवंत प्रमाण
लावण्या की कहानी इस बात की गवाह है कि अगर सही समय पर सरकारी योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत और चिरायु योजना) का लाभ मिले, तो सुदूर वनांचल क्षेत्रों में भी बदलाव मुमकिन है। आज लावण्या सिर्फ स्वस्थ ही नहीं है, बल्कि वह उन हजारों बच्चों के लिए एक प्रेरणा है जो किसी न किसी शारीरिक कमी के कारण समाज की मुख्यधारा से कतराते हैं।
















