टॉप न्यूज़

मध्य पूर्व संकट की आग : यूरोप में जेट ईंधन की भारी किल्लत, क्या थम जाएंगे उड़ानों के पहिए?

वाशिंगटन (एजेंसी)। मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अब दुनिया के सामने एक गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने एक चौंकाने वाली चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यूरोप के पास अब केवल 6 हफ्तों का जेट फ्यूल बचा है। यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा और बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द हो सकती हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): वैश्विक आपूर्ति की कमजोर कड़ी

इस संकट के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए जीवन रेखा माना जाता है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल यहीं से होकर गुजरता है। युद्ध की वजह से इस मार्ग पर आपूर्ति बाधित हो गई है।

बिरोल का मानना है कि यदि यह रास्ता जल्द ही सामान्य नहीं हुआ, तो मानवता अब तक के सबसे भीषण ऊर्जा संकट का सामना कर सकती है। इसके कुछ प्रमुख परिणाम इस प्रकार होंगे:

हवाई यातायात ठप: ईंधन की कमी से उड़ानों का संचालन मुश्किल होगा।

महंगाई में उछाल: पेट्रोल, डीजल और बिजली की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर जा सकती हैं।

आर्थिक मंदी का डर: सप्लाई चेन टूटने से वैश्विक विकास दर (GDP) में गिरावट आएगी।

विकासशील देशों पर दोहरी मार

IEA प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इस संकट की सबसे ज्यादा कीमत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के गरीब और विकासशील देशों को चुकानी पड़ेगी। विकसित देशों की तुलना में इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं इस झटके को सहने में कम सक्षम हैं, जिससे वहां गहरी आर्थिक मंदी और असमानता बढ़ने का खतरा है।

‘टोल बूथ’ विवाद और समुद्री व्यापार का भविष्य

ईरान द्वारा होर्मुज मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स (टोल) लगाने के प्रयासों पर बिरोल ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि अगर इस तरह की वसूली को मान्यता मिली, तो भविष्य में मलक्का जलडमरूमध्य जैसे अन्य महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर भी इसी तरह के प्रतिबंध लग सकते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार के लिए एक खतरनाक मिसाल होगा।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियां

मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, संकट की गंभीरता को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

फंसे हुए जहाज: फारस की खाड़ी में 110 से अधिक तेल टैंकर और 15 से ज्यादा LNG जहाज अटके हुए हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान: युद्ध के कारण 80 से अधिक ऊर्जा केंद्रों को क्षति पहुंची है।

रिकवरी का समय: उत्पादन सामान्य होने में महीनों और पूरी तरह पटरी पर लौटने में 2 साल तक का समय लग सकता है।

यदि मई के अंत तक कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो दुनिया को उच्च मुद्रास्फीति और धीमी विकास दर के एक लंबे दौर के लिए तैयार रहना होगा। हालांकि, फातिह बिरोल ने यह भी संकेत दिया कि यह संकट दुनिया को परमाणु ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा (Alternative Energy) की ओर तेजी से बढ़ने के लिए मजबूर कर सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज के रास्ते को सुरक्षित खोलने पर टिकी हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button