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नारी शक्ति वंदन अधिनियम : पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने की ऐतिहासिक कदम की सराहना

नई दिल्ली (एजेंसी)। देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विशेष पत्र लिखकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के कार्यान्वयन के प्रति अपना पूर्ण समर्थन जताया है। उन्होंने इस पहल को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक मील का पत्थर बताया।

प्रधानमंत्री को लिखे अपने संदेश में उन्होंने निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

लोकतंत्र की मजबूती: उन्होंने कहा कि विधायी संस्थाओं में महिलाओं की अधिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक क्रांतिकारी परिवर्तन है।

निर्णय लेने में समानता: पूर्व राष्ट्रपति के अनुसार, महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब उन्हें राष्ट्र को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों में समान अवसर प्राप्त हों। यह संशोधन केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि लैंगिक समानता और समावेशी शासन के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

नीति निर्धारण में सुधार: श्रीमती पाटिल ने विश्वास व्यक्त किया कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ने से विधायी चर्चाएं अधिक संतुलित, सहानुभूतिपूर्ण और विविध दृष्टिकोणों से परिपूर्ण होंगी। यह कदम आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने के लिए प्रेरित करेगा।

सामाजिक बाधाओं का अंत: उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय महिलाओं ने हमेशा सामाजिक और ढांचागत चुनौतियों को पार करते हुए देश के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। यह नया कानून उनकी क्षमता को औपचारिक पहचान देता है और नेतृत्व के शीर्ष स्तरों तक उनकी पहुंच आसान बनाता है।

निष्कर्ष: पूर्व राष्ट्रपति ने इस कानून को ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने और एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम करार दिया है। उनके अनुसार, यह निर्णय एक सशक्त और प्रगतिशील भारत की नींव को और गहरा करेगा।

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