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बिहार की सत्ता में नया समीकरण : विजय चौधरी को मिली उपमुख्यमंत्री की कमान

पटना (एजेंसी)। बिहार के सियासी परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के हटने के बाद सूबे में एनडीए गठबंधन की एक नई संरचना तैयार हुई है। इस नए फेरबदल में भारतीय जनता पार्टी के सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की बागडोर संभाली है, जो बिहार भाजपा के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से उनके सबसे विश्वसनीय और अनुभवी रणनीतिकार विजय कुमार चौधरी को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ ही जदयू के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।

विजय चौधरी की इस पद पर नियुक्ति को महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह नीतीश कुमार की एक गहरी राजनीतिक बिसात है। भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के पास गई हो, लेकिन विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव जैसे दिग्गजों को उपमुख्यमंत्री बनाकर जदयू ने सत्ता के संतुलन और प्रशासन पर अपना प्रभाव बरकरार रखने की कोशिश की है। अपनी सादगी और संसदीय नियमों की गहरी समझ के लिए मशहूर विजय चौधरी विवादों से दूर रहकर काम करने वाले नेता माने जाते हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

8 जनवरी 1957 को समस्तीपुर के दलसिंहसराय में एक भूमिहार ब्राह्मण परिवार में जन्मे विजय चौधरी को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता, स्वर्गीय जगदीश प्रसाद चौधरी, न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि कांग्रेस के टिकट पर तीन बार विधानसभा के सदस्य भी रहे।

विजय चौधरी ने अपनी उच्च शिक्षा पटना विश्वविद्यालय से प्राप्त की, जहाँ से उन्होंने 1979 में इतिहास में एम.ए. किया। राजनीति में आने से पहले उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में भी हाथ आजमाया। 1979 में वे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के रूप में नियुक्त हुए और केरल के त्रिवेंद्रम में कार्यरत रहे।

राजनीतिक सफर का आगाज

अपने पिता के देहावसान के बाद, उन्होंने बैंक की प्रतिष्ठित नौकरी को अलविदा कह दिया और जनसेवा की राह चुनी। 1982 के उपचुनाव में वे कांग्रेस की ओर से दलसिंहसराय सीट पर चुनाव लड़े और पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1985 से 1990 तक भी वे कांग्रेस विधायक के रूप में विधानसभा पहुंचे।

दशकों तक कांग्रेस में सक्रिय रहने और महासचिव जैसे पदों की जिम्मेदारी निभाने के बाद, साल 2005 में उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया और जदयू में शामिल हो गए। वर्तमान में वे समस्तीपुर जिले की सरायरंजन सीट से विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रशासनिक अनुभव का विशाल भंडार

अपने लंबे और बेदाग राजनीतिक जीवन में विजय चौधरी ने बिहार सरकार के लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों का संचालन किया है। वे बिहार विधानसभा के 15वें अध्यक्ष के पद को भी सुशोभित कर चुके हैं। उनके पास वित्त, शिक्षा, जल संसाधन, संसदीय कार्य, ग्रामीण विकास और भवन निर्माण जैसे प्रमुख मंत्रालयों को संभालने का व्यापक अनुभव है।

2008 में वे पार्टी के मुख्य प्रवक्ता भी रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत सदन के भीतर सरकार का पक्ष तार्किक और प्रभावी ढंग से रखने की उनकी अद्भुत क्षमता है, जिसने उन्हें आज इस ऊंचे पद तक पहुँचाया है।

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