वैशाख अमावस्या 2026 : लक्ष्मी-नारायण और शुक्र देव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय

न्युज डेस्क (एजेंसी)। आज 17 अप्रैल, 2026 को वैशाख मास की अमावस्या है। इस बार यह तिथि शुक्रवार के दिन पड़ने से एक अत्यंत शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। शास्त्रों में वैशाख अमावस्या का विशेष महत्व है, और जब यह शुक्रवार को आती है, तो यह धन की देवी लक्ष्मी, जगत के पालनहार श्री विष्णु और भौतिक सुखों के स्वामी शुक्र देव की आराधना के लिए सर्वोत्तम बन जाती है।
इस विशेष अवसर पर किए गए कुछ सरल उपाय आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के द्वार खोल सकते हैं।
शुक्र देव की कृपा हेतु पूजन विधि
ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को ऐश्वर्य और वैभव का कारक माना गया है। यदि आपकी कुंडली में शुक्र कमजोर है, तो आज के दिन निम्नलिखित विधि से पूजा करें:
स्वच्छता और संकल्प: प्रातः काल स्नान के पश्चात स्वच्छ सफेद वस्त्र धारण करें। अपने पूजा घर को साफ कर घी का दीपक जलाएं।
गणेश वंदना: सर्वप्रथम प्रथम पूज्य गणेश जी का आह्वान करें। उन्हें अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
शुक्र देव का ध्यान: शुक्र देव की मूर्ति या चित्र के समक्ष सफेद फूल चढ़ाएं। यदि शुक्र देव का चित्र न हो, तो आप भगवान शिव की पूजा भी कर सकते हैं, क्योंकि शुक्र देव महादेव के अनन्य भक्त हैं।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान ‘ॐ शुं शुक्राय नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
भोग: मां लक्ष्मी और शुक्र देव को खीर, मिश्री या सफेद मिठाई का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
आर्थिक उन्नति के लिए विशेष उपाय
जीवन में चल रही आर्थिक तंगी या वैवाहिक क्लेश को दूर करने के लिए इस अमावस्या पर ये कार्य अवश्य करें:
श्वेत वस्तुओं का दान: शुक्रवार और अमावस्या के मेल पर सफेद वस्तुओं जैसे— चावल, दूध, चीनी, कपूर या सफेद वस्त्र का दान किसी जरूरतमंद को करें। इससे शुक्र ग्रह मजबूत होता है।
पीपल की सेवा: वैशाख अमावस्या पर पीपल के वृक्ष में देवताओं और पितरों का वास माना जाता है। पीपल की जड़ में जल अर्पित करें और संध्या के समय सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।
पितृ तर्पण: यह दिन पितरों को समर्पित है। उनके नाम पर तर्पण या अन्न दान करने से परिवार पर आने वाले संकट टल जाते हैं।
शिव आराधना का महत्व
अमावस्या तिथि पर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करने का भी विधान है। शिवलिंग पर दूध और गंगाजल अर्पित करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि शुक्र जनित दोषों का भी शमन होता है। बेलपत्र और चंदन अर्पित कर अपनी भूलों के लिए क्षमा याचना करें।
विशेष टिप: वैशाख अमावस्या के दिन अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों को भोजन कराना, अक्षय पुण्य की प्राप्ति कराता है।










