बिहार में ‘भाजपा युग’ का उदय : सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर रचा इतिहास

पटना (एजेंसी)। बिहार की सियासत में 15 अप्रैल 2026 की तारीख एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गई है। नीतीश कुमार के पद त्यागने के बाद, प्रदेश में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार का गठन हुआ है। भाजपा के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। राजभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल सैयद अताउल हसनैन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस राजनीतिक बदलाव की पटकथा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सक्रियता के बाद लिखी गई, जिन्होंने नेतृत्व को लेकर जारी संशयों को खत्म करते हुए सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगाई।
राजनीतिक विरासत और शुरुआती सफर
मुंगेर जिले के तारापुर (लखनपुर गांव) में 16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी (राकेश कुमार) को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी माता पार्वती देवी भी विधायक रही हैं।
शुरुआत: उन्होंने 1990 के दशक में राजद (RJD) से अपने करियर का आगाज किया।
युवा मंत्री: मात्र 31 साल की उम्र में वे राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने, जो उस समय एक बड़ी उपलब्धि थी।
भाजपा में आगमन: जदयू में संक्षिप्त समय बिताने के बाद, साल 2017 में वे भाजपा में शामिल हुए और तब से उनकी प्रगति की रफ्तार काफी तेज रही।
भाजपा की रणनीति और बढ़ता कद
सम्राट चौधरी को बिहार में भाजपा की ‘ओबीसी आउटरीच’ रणनीति का मुख्य चेहरा माना जाता है। पिछड़ा वर्ग (कुर्मी समाज) से आने वाले चौधरी की पकड़ जमीनी स्तर पर काफी मजबूत मानी जाती है।
वर्ष,प्रमुख जिम्मेदारी / उपलब्धि
2023,बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त हुए।
2024,नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री के तौर पर वित्त और स्वास्थ्य जैसे अहम विभाग संभाले।
2025,विधानसभा चुनाव में तारापुर सीट से शानदार जीत दर्ज की।
चुनौतियां और विवाद
सफलता के साथ-साथ सम्राट चौधरी का विवादों से भी नाता रहा है। 2025 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन पर पटना और मुंगेर में दो आपराधिक मामले लंबित हैं। इसके अतिरिक्त, लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन के मामले भी उन पर दर्ज हुए थे। आर्थिक रूप से, उन्होंने अपनी कुल चल-अचल संपत्ति 10 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है।
बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी के सामने अब राज्य के विकास और गठबंधन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की बड़ी चुनौती होगी।
















